Shekshpiar ke anmol vichar



शेक्सपीयर की ये 10 अनमोल बातों पर अमल करने वाले जीवन में कभी नहीं हारेंगे।


‘‘सितारों में इतनी हिम्मत नहीं कि वे हमारी किस्मत का फैसला करें, बल्कि हमारी किस्मत हमारे हाथों में है।’’ यह बात विश्व के प्रसिद्ध लेखक और नाटककार विलियम शेक्सपियर ने वर्षों पहले कही थी। आज भी जीवन के कई मोड़ पर इस तरह के विचार हमारे लिए दवा की तरह काम करते हैं। इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि एक बेहतर इंसान, अपने सुविचारों और कर्मों से ही बना जा सकता है। हमारी सोच ही है, जो हमें सफल या असफल बनाने की योग्यता रखता है। लेकिन जीवन में ऐसे कई मौके आते हैं, जब हम अपनी ही परेशानियों में ऐसे उलझ जाते हैं कि बाहर निकलने का रास्ता नजर नहीं आता है। ऐसी स्थिति में प्रेरणादायक विचार और अच्छे शब्द ही होते हैं, जो हमें सही राह दिखा सकते हैं।



विश्व के कई महान व्यक्तियों और लेखकों ने ऐसे विचार दिए हैं, जो हमें जीवन में सही दिशा दिखाते हैं। इनमें से ही एक हैं, विलियम शेक्सपियर। शेक्सपियर की रचनाओं का जादू आज भी दुनिया पर छाया हुआ है। एक तरफ जहां उनके नाटकों में हमें जीवन का हर रंग देखने को मिलता है, वहीं उनकी रचनाएं और विचार एक सफल जीवन जीने का मार्ग भी दिखलाती हैं। उनकी कही हुई बातें हमें गंभीर जीवन का दर्शन कराती हैं। शेक्सपियर के गाने, नाटक और उद्धरण हमारे लिए वास्तव में किसी दोस्त की सलाह की तरह काम करते हैं। ऐसी सलाह जो हमें जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं और रिश्तों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। 


आइए देखते हैं, शेक्सपियर द्वारा लिखी जीवन से जुड़ी 10 खास प्रेरणा भरी बातें, जो हमारे सोच और आस-पास के लोगों को समझने और रिश्तों को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं।

1-कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता है, हमारी सोच उसे अच्छा या बुरा बनाती है। 


यह संवाद शेक्सपियर के 'हेमलेट' नाटक की है। नाटक के नायक ‘हेमलेट’ ने यह बात अपने पिता की मौत का बदला लेने की कई योजनाओं में से एक को समझाते हुए रोसेनक्रांज और गिल्डनस्टर्न से कही थी। लेकिन आज के समय में भी यह विचार हमारे लिए एकदम सटीक लगती है। हमारे सामने ऐसी स्थिति न जाने कितनी बार आती है, जब हम अच्छे और बुरे परिणामों के सोच-विचार में उलझे रहते हैं। यह उलझन पूरी तरह से समान्य और प्राकृतिक है। 

लेकिन हेमलेट यहां एक अच्छी चीज समझाते हैं कि अगर हम किसी चीज के बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं, तो यह हमारी उम्मीदों को या तो बहुत ऊंचा या बहुत नीचे निर्धारित करता है, जो ठीक नहीं है। किसी चीज के बारे में अत्यधिक सोचना हमें उत्तेजित और सनक से भरा हुआ बना सकता है। इसलिए कभी-कभी कुछ चीजों को बस होने के लिए छोड़ देना बेहतर होता है। 


2-बुद्धिमानी सेे और सोच-विचार कर आगे बढ़ो। जो जल्दबाजी करते हैं, वे गिर जाते हैं।


यह संवाद 'रोमियो और जूलियट' नाटक का है। हकीकत यह है कि इस वाक्य को हमारी जिंदगी का सिद्धांत होना चाहिए। अगर आपको लगता है कि जीवन के किसी क्षेत्र में पीछे चल रहे हैं, तो ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। बचपन में खरगोश और कछुए की कहानी तो आपने पढ़ी होगी, तो बस याद रखें की रेस जीतने के लिए हमेशा तेज गति काम नहीं आती।  मगर इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप बैठकर किसी जादू का इंतजार करें, बल्कि इसका अर्थ यह है कि जीवन के छोटे-बड़े निर्णय आराम से सोच-समझकर लें, न कि आगे बढ़ने की जल्दबाजी में कुछ भी फैसला ले लें।  

3-प्यार अंधा होता है और प्यार में डूबे लोगों की अच्छे या बुरे की समझ कम हो जाती है।


यह संवाद शेक्सपियर के ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ नाटक की है। नाटक में जेसिका अपने प्रेमी लोरेंजो से कह रही हैै कि उसकी यहूदी जाति से होने के कारण उसका प्यार करना वर्जित है। इसलिए वह इसे अनदेखा कर अपने प्रेमी के साथ भागने की योजना बना रही है। 

जाति आदि को छोड़ किसी को दिल से प्यार करना... प्रेम में अच्छी बात के लिए अंधे होने का यह एक बेहतर उदाहरण है, लेकिन इस उद्धरण से एक और अवचेतन संदेश, जिससे हम सीख सकते हैं, वह यह है कि प्रेम में आप किसी गलत तरीके से भी अंधे हो सकते हैं और गलत रास्ते चुन सकते हैं। अगर वहीं प्रेम में अंधे हो कर हम किसी और को नुकसान पहुंचाते हैं तो वो गलत है


4-यदि आप हमें कांटा चुभाएं, तो क्या हमारा खून नहीं निकलेगा? आप हमें गुदगुदी करें, तो हम हंसे नहीं? अगर आप हमें जहर देंगे, तो क्या हमारी मौत नहीं होगी? और यदि आप हमारे साथ गलत करते हैं, तो क्या हम बदला नहीं लेंगे? 


शेक्सपियर के नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ में शॉयलक ने यह यहूदी जाति की रक्षा में न्यायालय में कहा था। यहां शेक्सपियर हर इंसान के साथ समान व्यवहार करने की सीख देते हैं। निश्चित रूप से हम इसे 16वीं शताब्दी में एक मुद्दा के रूप में देख सकते हैं, लेकिन यह और भी आश्चर्यजनक है कि यह उद्धरण आज एक राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक होना जारी रखता है।

5-महंगे उपहार से ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिन्हें उपहार दे रहे हैं उनका सम्मान हो।


'हेमलेट' नाटक में इस विचार का उल्लेख किया गया है। यहां शेक्सपियर हमें दोस्ती और विश्वास से संबंधित सीख देते हैं। दोस्ती में विश्वास सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसकी कीमत पैसों से नहीं लगाई जा सकती है। ऐसा नहीं है कि यदि कोई आपको पैसे दे रहा हो या किसी और तरह से आप पर खर्च कर रहा है, तो वह आपका दोस्त ही हो। हो सकता उसकी मंशा कुछ और हो। हो सकता है कि आपके दोस्त ने आपके जन्मदिन पर कोई महंगा तोफा दिया हो, लेकिन ज्यादा जरूरी यह है कि आपके प्रति उनका रवैया कैसा है? शेक्सपियर हमें यहां निश्चित रूप से याद दिला रहे हैं कि पैसों से आपको चकाचौंध मिल सकती है, लेकिन पैसे से आप दोस्त नहीं खरीद सकते हैं। 


6-दुखी लोगों के पास कोई अन्य इलाज नहीं, बल्कि केवल आशा है।


नाटक ‘मेजर फॉर मेजर’ में इसका उल्लेख किया गया है। यहां शेक्सपियर सही कहते हैं कि उम्मीद की छोटी-सी किरण बड़े से बड़े अंधकार को दूर कर सकती है। परेशानी और दुख में हमारा सबसे बड़ा साथी उम्मीद और भरोसा ही है। इनके सहारे ही हम बड़ी-बड़ी परेशानियों का सामना कर, उससे बाहर निकल सकते हैं। 

7-शैतान अपने उद्देश्य के लिए धर्मग्रंथों का सहारा ले सकते हैं।


शेक्सपियर ने इस बात का उल्लेख 'मर्चेंट ऑफ वेनिस' में किया है। यहां शेक्सपियर षड्यंत्रकारियों से सावधान रहने की सीख देते हैं। किसी अविश्वसनीय दोस्त के साथ रहने का मतलब है कि आप षड्यंत्र का शिकार हो सकते हैं। स्थिति और भी बदतर होती है, जब आप यह नहीं समझते कि उनके द्वारा कहे गए शब्द या क्रियाएं हानिकारक हैं। शेक्सपियर हमें यहां सिखाते हैं कि सोच-समझकर ही किसी पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि हमे किसी के भी इरादों का पता नहीं होता है।


8-कुछ नहीं से कुछ भी नहीं आएगा। यानी सफल होने के लिए उस दिशा में काम करना जरूरी है। 


इस बात का जिक्र 'किंग लियर' नामक नाटक के एक सीन में किया गया है। यहां बताया जा रहा है कि यदि आप कुछ पाने के लिए कोशिश या कड़ी मेहनत नहीं करते हैं, तो आपको न सफलता मिलती है और न ही असफलता। हमारा उद्देश्य कार्य करना और उसे मेहनत के साथ पूरा करना है। पूर्ण जीवन जीने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। 


9-एक मासूम फूल की तरह दिखो,  लेकिन अंदर से सर्प की तरह रहो।


इस बात का उल्लेख ‘मैकबेथ’ नाटक में है। यहां शेक्सपियर सीख देते हैं कि हमारे चेहरे से हमारे भीतर चल रही हलचल नहीं झलकनी चाहिए। आप जो चाहते हैं, वह निश्चत करें और इस बारे में सावधान रहें कि हम इसे कैसे प्राप्त करते हैं। कभी-कभी स्वार्थी होने में कोई हर्ज नहीं है। दरअसल, थोड़ा स्वार्थी होना, हमे लंबे समय तक समझदारी से निर्णय लेने में मदद कर सकता है। 

10-बीती बात को बार-बार याद कर शोक मनाना, नई मुसीबत बुलाने जैसा है। जो हमारी किस्मत में नहीं है, उसके लिए शिकायत करना बेकार है। 


शेक्सपियर के नाटक ‘ओथेलो’ में यह संवाद है। यहां यह सीख दी जा रही है कि कुछ चीजों को छोड़ना ही जीवन में आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका है। यदि आप बीती बातों पर शोक मनाते रहेंगे, तो आप उससे आगे कभी नहीं बढ़ पाएंगे। आप भाग्य नहीं बदल सकते हैं, तो आप इसके बारे में शिकायत करके इसे और भी बदतर बनाते हैं। बजाय इसके, अगर आप चीजों का मुस्कुरा कर सामना करते हैं, तो परेशानी जल्द दूर होती है।


      मोटिवेशनल कोट्स निश्चित रूप से हमारे जीवन में गाइडलाइन्स की तरह काम करते हैं, जब हम किसी बात को लेकर दुखी होते हैं या उदास होते हैं। इससे बाहर निकलने में दार्शनिकों और मोटिवेशनल गुरु के प्रेरणादायी शब्द या कोट्स ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम जब ऐसे प्रेरणादायक विचार पढ़ते हैं, तो उससे अपना बिहेवियर मैच करते हैं और फिर उस दिशा में काम करना शुरू करते हैं। लेकिन इन कोट्स का ज्यादा प्रभाव तभी होता है, जब हम इसे बार-बार पढ़ते हैं।


ऐसी स्थिति में जब हम उदास हैं या परेशान हैं, तो हमें इन विचारों को बड़े अक्षरों में लिखकर घर में किसी ऐसी जगह पर लगाना चाहिए, जहां हमारी नजर बार-बार जाती है। हम बार-बार उसे पढ़ते हैं और फिर धीरे-धीरे वह हमारे सब-कॉन्शस यानी अवचेतन मन में बैठने लगता है और हम उसी तरफ काम करना शुरू करते हैं। अवचेतन मन पर ऐसे विचारों का ज्यादा असर पड़ता है।

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